नई दिल्ली: कथित पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरोध से शुरू हुआ जंतर-मंतर का आंदोलन देखते ही देखते देश के सबसे चर्चित छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया। लगातार 37 दिनों तक छात्र और उनके समर्थक जंतर-मंतर पर डटे रहे। उनकी प्रमुख मांगों में पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना और व्यापक शिक्षा सुधार शामिल थे।
समय के साथ इस आंदोलन को देशभर से समर्थन मिलने लगा। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन में शामिल हुए और छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठे। इस दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर देशभर में व्यापक चर्चा हुई और बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी चिंताएं खुलकर सामने रखीं।
आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए एक दुर्लभ वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान, तेज जांच प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने प्रमुख मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। शिक्षा सुधारों पर निरंतर संवाद जारी रखने और आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा 37 दिनों का धरना शांतिपूर्वक समाप्त कर दिया गया।
यह आंदोलन इस बात का संकेत बनकर उभरा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता अब केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे देश का महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है। हालांकि धरना समाप्त हो गया है, लेकिन अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार अपने वादों को ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती है।
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